रंज क्यों है, किसलिए है
सोचकर देखो जरा ये
अनगिनत ख़ुशियां मिली हैं,
और थोड़ी सी उदासी
इस उदासी की परत को
तोड़ दो, मुस्कुराओ
बेवजह ही रोज़ घुट-घुट कर
न यूं ऐसे मरो तुम
ज़िन्दगी है जंग बस, लड़ते रहो
बढ़ते रहोगे
किस तरह , कैसे जियोगे तय
करो, खुद तय करो तुम
लोभ, झगड़ा व्यर्थ का हर
काम जाने किसलिए है
प्यार के दीये जलायें ज़िन्दगी
तो इसलिए है
हर घड़ी को धैर्य से हँसकर
जिया जाये अगर तो
हां बहुत आसान होगी, ज़िन्दगी
की हर डगर भी
ज़िन्दगी सुन्दर, बहुत सुन्दर ,
बहुत सुन्दर लगेगी
हम मिले, मिलते रहे, पर मन
न मिल पाये कभी भी
शाख पर मुरझा गये सब गुल
न खिल पाये कभी भी
बेसबब, बेआबरू होकर जिये
थे प्यार में हम
दर्द में ख़ामोश था मन, हो
गयी थी आंख भी नम
इस दिले बीमार का किस्सा
सुनायें रोज कैसे
किस तरह तुमको भुलायें दूर
हो ये सोज़ कैसे
बिन बताये दूर कोसों दूर
मुझसे हो गया वो
छोड़कर दामन हमारा
अब किसी का हो गया वो
अब करूं शिकवा खुदा से या
करूं खुद से शिकायत
कुछ समझ आये नहीं अब,थी
मुहब्बत या अदावत
कर लिए वादे हजारों, साथ में
क़समें उठाईं
वक़्त आया जब निभाने का
नहीं उसने निभाईं
कुछ दिलासों का सहारा, कुछ
वफ़ाओं का सहारा
बेवजह मझधार को हम मान
बैठे थे किनारा
अब यकीं खुद को दिलाऊं या
ज़माने को दिलाऊं
आज कोई ये बताये किस
तरह सबकुछ भुलाऊं
क्यों निहारूं राह उसकी जो
गया हो बिन बताये
दास्तां उसकी लिखूं क्या
लौटकर जो फिर न आये