1. खफ़ा होकर जुदा तुमसे, भले ही रह नहीं सकता।
कि कितना प्यार है तुमसे, तुम्हें ये कह नहीं सकता।।
 बहुत ही सख़्त होता हूं, उसूलों की डगर पर मैं।
 मुहब्बत की हदें टूटें, नहीं ये सह नहीं सकता।।



 2. तुम्हारे ख़्वाब रातों में, मुझे सोने नहीं देते।
 कभी हँसने नहीं देते, कभी रोने नहीं देते।।
बिना डोरी, बिना बन्धन, तुम्हारा हो गया हूं मैं।
किसी का भी जहां में अब, मुझे होने नहीं देते।।



 3. गये हो दूर जबसे तुम, न जीते हैं, न मरते हैं।
 तुम्हारे बिन अकेले के, मुझे पल-पल अखरते हैं।।
सताओ मत चले आओ, जिया जाये नहीं तुम बिन।
न मेरी रात कटती है, न मेरे दिन गुजरते हैं।।



4. तुम्हारी याद में अक्सर, प्रिये जगने लगे हैं फिर।
 सुहाने स्वप्न रातों में, मुझे ठगने लगे हैं फिर।।
समझ में कुछ नहीं आता, करूं भी तो करूं क्या"प्रिय"।
मुझे ये रतजगे प्यारे, बहुत लगने लगे हैं फिर।।



5. तुम्हारा नाम होठों पर, ज़ुबां पर इक तराना है।
तुम्हें क़समें निभानी हैं, मुझे वादा निभाना है।।
 युगों से हम तुम्हारे हैं, युगों से तुम हमारे *प्रिय*।
हमारे नाम बदले हैं, मगर बन्धन पुराना है।।



6. अजब सा हाल है मेरा, न जीता हूं मरता हूं।
 तङपता हूं, सिसकता हूं, कि छुप-छुप आह भरता हूं।।
 ज़माने से छुपायें क्यों, चलो ऐलान कर दें *प्रिय*।
 मुझे तुम प्यार करते हो, तुम्हें मैं प्यार करता हूं।।



7. अभी भूला नहीं है दिल, अकेले की मुलाक़ातें।
 हमेशा याद आती हैं, बिताई संग बरसातें।।
बरस बीते कई लेकिन, ज़ुबां पर आज भी सबके।
 तुम्हारे प्यार की बातें, हमारे प्यार की बातें।।



8. तङपना भी मुहब्बत है, सिसकना भी मुहब्बत है।
पलक मूंदे सहम जाना, सिमटना भी मुहब्बत है।।
 मुहब्बत है खफ़ा होना, तुम्हारा रूठकर जाना।
 वहीं से लौट आना फिर, लिपटना भी मुहब्बत है।।



9. कभी इन्कार का जादू, कभी तक़रार का जादू।
 कभी ख़ामोश नज़रों में छुपे इज़हार का जादू।।
जहां देखूं,जिधर देखूं, तुम्हीं तुम रूबरू हो अब।
गली तक खींच लाता है तुम्हारे प्यार का जादू।।



10. तुम्हें सौगन्ध है मेरी, मुझे सच सच बताना तुम।
जिया का हाल कह देना, नहीं कुछ भी छुपाना तुम।।
अगर रोके तुम्हें लज्जा, अगर रोकें तुम्हें बन्धन।
ज़ुबां से कुछ नहीं कहना, निगाहों से जताना तुम।।



11. निगाहों ही निगाहों में, जरा सी बात होने दो।
 बिखेरो गेसुओं को यूं, दिवस में रात होने दो।।
 समय की गति ठहर जाये, निहारो इस तरह पल भर।
बुझा दो प्यास अधरों की, प्रिये बरसात होने दो।।



12. उजाले की तरह बिखरो, अँधेरा दूर हो जाये।
 तुम्हारा नाम भी जग में, बहुत मशहूर हो जाये।।
 इरादे जानकर ही हर, मुसीबत छोङ दे रस्ता।
 हवा सहमे,थमे तूफ़ां, समय मजबूर हो जाये।।



13. तुम्हीं पर जान है क़ुरबां, तुम्हारी ही इबादत है।
 करो दिल पर सितम हँसकर, तुम्हें इसकी इजाज़त है।।
 खुशी से हार जाऊंगा, तङपकर जान दे दूंगा।
 शिकायत है, अदावत है, मगर फिर भी मुहब्बत है।।



14. आडम्बर से मन अपना भरमाऊं क्यों।
हर पत्थर की झूठी महिमा गाऊं क्यों।।
मां की ममता में मन्दिर है, मस्जिद है।
और कहीं भी सजदा करने जाऊं क्यों।।



15. हौंसला हो ज़िन्दगी का, प्रेम का विस्तार हो तुम।
 सृष्टि का आधार हो तुम, इस जगत का सार हो तुम।।
छांव में तेरी रहूं बस, आरज़ू रब से यही है।
 हर जनम् है चाह जिसकी, मां वही उपहार हो तुम।।



16.कहीं ऐसा न हो हर इक ,दुआ नाकाम हो जाये।।
हमारे प्यार का चर्चा, जहां में आम हो जाये।।
 चलो ऐसा करें कुछ हम, मिसालें दे ज़माना ये।
 जहां जिस भूमि पर दें प्रा,ण पावन धाम हो जाये ।।



 17. नज़र जब भी मिले मुझसे, गुलों सा तुम खिला करना।
 भले ही दूर रहना पर,नहीं शिकवा, गिला करना।
 अगर फिर भी शिकायत हो, मिलाना मत नज़र मुझसे।
 मगर चुपचाप रातों में, खयालों में मिला करना।।



18. धरा से दूर उस नभ तक, मुहब्बत का तराना है।
 उसी की तान में डूबा, हुआ सारा ज़माना है।।
 भले इन्कार कर दो "प्रिय", मिलाओ मत नज़र मुझसे।
 तराना ये मुहब्बत का, तुम्हें भी गुनगुनाना है।।



19. हजारों बीज नफ़रत के, जिया में बो गये हो तुम।
 उड़ा दी नींद आंखों से, मगर खुद सो गये हो तुम।
ज़ुबां से नाम भी मेरा, न लेना है क़सम तुमको।
किसी से कर लिए वादे, किसी के हो गये हो तुम।।



20. कभी खुद मान जाते हैं, कभी खुद रुठ जाते हैं।
 घरौंदा बन नहीं पाता, सपन भी टूट जाते हैं।।
झुकाकर के नज़र अपनी, सहम कर जब लिपटते हो।
 उमड़ उठता समुन्दर यूं, किनारे छूट जाते हैं।।



21. तुम्हारी आरज़ू में अब, हदों से भी गुजर जाऊं।
 नहीं परवाह है कुछ भी, जिऊं अब या कि मर जाऊं।।
मुझे आबाद होना है, मुहब्बत में लुटाकर सब।
 ख़ुशी से जान दे दूंगा, अगर मरकर सँवर जाऊं।।



22. ख़ुशी का राज ढूढ़ा है, तड़प में, आह में हमने।
 सहे हैं दर्द हँस-हँसकर, तुम्हारी चाह में हमने।।
 कभी हँसकर बहे आंसू, कभी रो कर हँसे पल भर।
 हजारों रंग देखे हैं, वफ़ा की चाह में हमने।।



23. ख़ुशी से हर खुशी मुझको, अता तू क्यों नहीं करता।
मुहब्बत हो गयी मुझसे, पता तू क्यों नहीं करता।।
 ज़रुरत है, इरादत है, यही रब की इबादत है।
 ख़ता ता है गर मुहब्बत तो, ख़ता ता तू क्यों नहीं करता।।



24. रूक नहीं सकता बवंडर हूं।
 थाह मत नापो समुन्दर हूं।।
मुश्किलें भी राह देती हैं।
लोग कहते हैं सिकन्दर हूं।।



25. सुर्ख़ लहू जो बहता तुझमें,उसकी आज रवानी लिख।
जिस माटी में जन्मा है तू उसके नाम जवानी लिख।।
कर बलिदान वतन पर तन-मन यग-युग नाम रहे तेरा।
भारत माता की पोथी में अपनी एक कहानी लिख।।



26. हर.घड़ी आज तक आजमाती रही।
 बेबसी पर सदा मुस्कुराती रही।
 हम भुलाते रहे जाम पीकर तुझे।
 इस बहाने बहुत याद आती रही



27. प्यार की धूप में दर्द की छांव में।
दर ब दर फिर रहा हूं शहर गांव में।
 ज्योतिषी बांचते हस्त रेखा,मगर ।
जीतने का हुनर था लिखा पांव में।।



28. आस के रोज दीपक जलाते रहो।
 ज़िन्दगी गीत है गुनगुनाते रहो।।
 मुस्कुराता रहूं मैं तुम्हें देखकर।
तुम मुझे देखकर मुस्कुराते रहो।।



29. तुम्हारा नाम रट-रट कर नया सपना बुना हमने।
 किसी की भी नहीं मानी, कहा तुमने, सुना हमने।।
जहां सारा खफ़ा है पर,नहीं परवाह है इसकी।
इबादत छोड़ दी रब की, प्रिये तुमको चुना हमने।।



30. मान -मनौती हर दर की अरदास लगाये बैठे हैं।
 जितनी भी है पूंजी अपने पास लगाये बैठे हैं।।
तन्हां-तन्हां, तन्हाई में जीना है कितना मुश्किल।
 उसकी खिड़की खुल जाये ये आस लगाये बैठे हैं।।



31. पीर का साग़र पिया है इसलिए।
प्यार तुमसे कर लिया है इसलिए।।
 ज़िन्दगी अहसान है हम पर तुम्हारा।
 ये जिया अब तक जिया है इसलिए।।



32. आह से ,वाह का है सफ़र ज़िन्दगी।
 ज़श्न का दर्द का है असर ज़िन्दगी।।
 हार हो, जीत हो पर लड़ो शान से।
 जान लो, मान लो है समर ज़िन्दगी।।



33. जीत जाओ, हार जाना चाहता हूं।
 और खुद को आजमाना चाहता हूं।।
मुस्कुराहट आसुओं से छीन लूंगा।
 बस यही तुमको बताना चाहता हूं।।



34. हम ज़िन्दगी की चाह में ,वो दौलतों की चाह में।।
 बस फ़र्क़ है तो सोच का,अब कौन, किसकी थाह में।।
सब कोशिशें हैं बेअसर,क्या है सबब,बतला खुदा।
 हम भी खड़े हैं राह में, वो भी खड़े हैं राह में।।



35. आज़ादी की जब भी कोई बात उठाई जायेगी।
 वीर शिवा, सम्भा जी सबको याद तुम्हारी आयेगी।।
बलिदानों के किस्से गूंजेंगे धरती से अम्बर तक।
जब तक सूरज-चांद रहेगा महिमा गायी जायेगी।।



36. मुझे ही ढूंढ़ती है वो ,गली से जब गुजरती है
समझ में आ गया मुझको ,कि आखिर क्यों सँवरती है
कभी पायल बजे उसकी ,कभी चुनरी उड़े उसकी
करे इंकार कितना भी ,मुझे ही प्यार करती है